जबाब
सवालो के दायरे में जबाब बसते है, समाज के सवाल हमेशा से एक जैसे थे... आज की लड़की का जबाब कुछ बदल गया है... पहले पडता था फर्क तुम्हारे कहने से, अब आजादी में सांस लेना तुमसे ज्यादा जरुरी है. कभी चाहिए था हाथ सहारे के लिए अब कहो तो हाथ बढा सकती हूँ सहारा देने के लिए, कभी खुलकर हँसना भी था गुनाह तुम्हारी नज़र में, आज हसाने का दम रखती हूँ. कभी चाही थी तुमने अग्निपरिक्षा हर कदम पर, आज तुमसे सवाल कर पाने की ताकत रखती हूँ। तुम कहते हो बंधन हमारी सुरक्षा है लेकिन क्या कहोगें जब घर में ही बेआबरु होते है हम. मेरी जिन्दगी का हक एक आदमी को देना कैसे जाय़ज लगा तुम्हे ? शादी न करने की ज़िद पर तुम सब मिलकर मुझे ताने मारते हो और कहते हो शादी करने का फैसला मेरा था. अरे फैसला करने का हक था ही कब..ये सब तुम्हारे नियम है जो तुम्हारी सहूलियन के हिसाब से बदल जाया करते है जानते हो एक अच्छी बात क्या है , मैंने तुम्हारी सुनना ही बंद कर दिया है. मेरा दिल अगर कहेगा सही तो वो सही और कहेगा ग़लत तो मेरे क़दम ज़रूर रुक जायेंगे. तुमसे पूछना तो कबका छोड़ दिया मैंने लेकिन बताना भी अब छोड़ रह...